ज्योतिष संसार

कुछ लोगो को लगता है – कि भाग्य क्या है , भाग्यवादी क्यों बनना, भाग्यवादी इन्सान कर्म पथ से डिग जाता है , कर्म करो , कर्म अच्छे करो , जीवन को सही ढंग से जियो , सब कुछ तब ठीक ही होगा – क्योकि जब तक जीवन है तब तक कर्म है और कर्म ही जीवन का निष्कर्ष निर्धारित करता है।
लेकिन मेरे मित्रों – चाय के कप को होठों तक ले जाने के बीच की चंद
सैकैंड की दूरी के बीच भी अनगिनत घटनाएं घट सकती है – और हो सकता है की आप चाय पी ही ना सके।
सोचिये बन्धुओ कि जब ये चंद सैकैंड में घटित और फलित अनगिनत घटनाएं निर्णायक साबित हो सकती हैं और आपको चाय पीने से रोक सकती हैं या चाय को छलका सकती हैं या जरा सा ध्यान भटकने पर चाय कोई और उठा कर पी सकता है तो फिर इतनी बड़ी जिन्दगी का निर्णय आपके हाथ में होते हुए भी आपके पास नहीं है – क्या वास्तव मे आपके कर्म ही , आपकी समझ हीआपके जीवन का निर्धारण कर रहे हैं ? क्या आप इस गुरूर के साथ जी सकते है ?
बन्धुओ ज्योतिष शास्त्र एक मित्र एक मार्गदर्शक की तरह काम करता है – इसके पीछे अथक मेहनत , अनुभव , ज्ञान संचय व प्रयासो की जरूरत पडती है जो बर्षो के अनुभवी व्यक्ति ही आपकी समस्याओ का हल निकाल सकते है तथा मार्ग दर्शन कर पाते है। इन प्रयासो का सम्मान करें एंव जीवन की विकट सच्चाई से आंखे ना मोङे बल्कि इसे स्वीकार करे और जहां भी जीवन में संभावित बाधायों या कष्ट है उसका उपाय करने की कोशिश करे ।

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