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What Astrology all about:-

Astrology And Horoscope

Horoscope Analysis & Interpretations with Results, Reviews and Advices.

Horoscope Reading in Detail is not only a simple art but it is a very Complicated Science where lot of things to be taken care of.

When ever I make analysis I take care of :

Ascendent Horoscope

Moon Sign Horoscope

Sun Sign Horoscope

Niryan (Vedic) Horoscope

Chalit (Vedic)Horoscope

Sayan (Vedic)Horoscope

Hora (Vedic)Horoscope

All Sub (Vedic) Horoscopes like :

Trishansh , Panchmansh, Saptansh, Navmansh, Dashmansh, Dwadshansh,
Drekansh, Sodshansh, Shastiyansh,
Chaturthansh, Indu Lagnansh.

Altogether 18 Horoscopes and Vedic Ashtakvarg, Signs, House & Planets Power in respect to each other besides their Degrees at the time of Birth, Inmicability & Affinity of Planets & Signs with cross Horoscopes and All the Periods & Sub Periods as per Vishmotri Dasha ( even Asthotri if required in specific cases), Yogini Periods & Sub Periods and Signs Periods & Sub Periods.

After all such analysis I provide final results So for me it is not a simple game but a Matrix of numerous factors. More a person experienced in this Analysis better he could derive results.

Since last 30 years I am going on researching, gathering, analyzing this field and so try to give near to perfect results.

I not only stop here . I make a separate analysis as per Numerology and as per Palm Lines in Palmistry.

I make a full synchronization of all the three results and including my Intuitive direction provide any results which go on modifying and correcting your life

Lost Soul

https://notionpress.com/read/lost-soul

Sometimes Memories haunt ! Not because we are sentimental on our memories but the power of event of such memory make you vibrate just on thinking of it even for a second. 

Childhood events are very powerful event as there innocence shall not be just wiped off as innocence specially when it left a mark on you forever. at some later stage the whole body start vibrating thinking about the event and incident as a shocking revelation.

The first shocking revelation of human psychology which you can grasp only when you will go through this true incident word to word upto the last word.

i can’t make any one feel but my words can make them feel if read and abosorb every little bit of incident with closed eye. 

just it. Let the mystry be open with your reading. Good Luck

संभव हो जाता जग-गति सा

Be Possible like Pace of Universe

https://notionpress.com/read/be-possible-like-pace-of-universe

क्यों हम सब एक ऐसे दौर से गुजरते है जंहा, जब हमारे हाथ में कुछ नहीं होता । जितनी भी कोशिश करो होता वही है जो कहीं न कहीं नियति ने निश्चित कर रखा है । यदि आप के प्रयास व प्रयत्न सफल हो भी जाते हैं तो वो इसीलिए क्योंकि नियति ने वो सुनिश्चित कर रखा है और आपको लगता है कि ये आपके प्रयत्नों के कारण हुआ है । कुछ समय बाद आपको ये अहसास होने लगता हैं कि ये तो इसी तरह होना ही था । मगर क्यों ?
संभव हो जाता जग गति सा : एक मानसिक उद्वेलन है, एक चेतना, एक विचारधारा कि जिस तरह ये जग-गति स्व निर्मित, स्व संचालित, स्व आधारित है ठीक उसी तरह हमारा जीवन स्व संचालित, स्व आधारित, स्व निर्मित क्यों नही है । हर प्रयत्न व प्रयास के बाद भी जग गति सा एक धूरी पर स्थिर क्यों नहीं , क्यों सब कुछ इधर उधर बिखर जाता है, एक मानसिक द्वंद है कि क्यों सब कुछ प्रकृति की प्रवृति सा नहीं : क्यों नही संभव हो जाता जग गति सा ?

Why do we all go through an era where nothing happens as per our wish . Whatever we try, it happens as what destiny has set somewhere. Even if our efforts are successful, it is because destiny has ensured that and we feel that it has happened due to our efforts. After some time we start realizing that this was to happen in this way. but why ?

May It is not possible like the Pace of Universe. There is a mental upheaval, a consciousness, an ideology that just as this universe pace is self-created, self-driven, self-based, in the same way why our life is not self-driven, self-based, self-created. Even after every effort , why the our efforts and life is not stable on one axis, why everything is scattered here and there. There is a mental duality that why everything is not like nature’s nature or like the pace of universe why it is not possible to happen everything so natural and so inherent as the pace of universe.

एक मौसम आया कहने को

Weather Returns To Bear Pain

https://notionpress.com/read/weather-returns-to-bear-pain

अपनों के सफेद बालों को देखा तो मर्माहत हुआ– सर्व सत्य पर आहत क्यों? क्योंकि कई-कई महीनों के अंतराल पर मैं देखता था चेहरे पर निरंतर बढ़ती झुर्रियों को बालों की बढ़ती सफेदी को हाथ-पैरों की क्रमशः बढ़ती कंपन को अवसान एक उम्र की उमंग का…एक दौड़ का… मगर इस सच्चाई को बरदाश्त नहीं कर पाता था और मैं उन्हीं अपनों को जिनसे मैं तादात्म्य की तीव्र हूक रखता था उन्हीं को छोड़-छोड़ कर इधर-उधर भागता रहता था , भागता रहता हूं … 

मगर मौसम पीछा नहीं छोङते। वापस आ जाते हें लेकिन हम सब कुछ खो आते हैं – उम्र अपनी और अपनो की । हर बीते हुए पलों के साथ जो कुछ भी पीछे छूट जाता है उसकी जरा सी याद ही मौसम की हवाओं के साथ तड़पाती रहती हैं। हर मौसम एक अलग तरह की याद लेकर आता है और पूरे वजूद को झकझोर देता है । उन्हीं झकझोरते पलों मे उन्ही यादो ने गाया है ये दर्द।

माथे का टीका मिटा हुआ

Maathe Kaa Tika Mita Hua

https://notionpress.com/read/maathe-kaa-tika-mita-hua

एक बिन्दु से लेकर बृह्रमांड के वृहत्ताकार में एक विरोधाभास है बिन्दु को देखो तो व्यक्ति एकाग्रता को प्राप्त करने लगता है। और एकाग्रता मानसिक चेतनता को जन्म देती है। दूसरी और ब्रम्हाण्ड को समेटने की चेष्टा में मन विभ्रम हो एकाग्रता खो बैठता है। अचेतनता हावी होने लगती है। व्यक्ति को लौट कर बिन्दु पर नजर टिकानी पड़ती है अपनी खोई हुई एकाग्रता पाने के लिए।हां तो मेरे कवि ह्रदय ने उकसाया चलो बृह्रमांड की सैर कर आये और मैं सपनों में, भ्रमों में, अवचेतनता में छूने लगा उन पहलुओं को जो शायद चेतन मन छूने नहीं देता। लेकिन भला बृह्रामंड का सत्य हाथ आया है किसी के सिवाय एक आसान से निष्कर्ष के – कि जब तक सष्ष्टिक्रम चलते रहेगा,जब तक ब्रंद्याण्ड में तारे नक्षत्र ग्रह बनते, बिगडते रहेंगें, जब तक जीव सृजन होता रहेगा तब तक उत्थापन,विघटन,प्रलय व संहार व तन ह्रास होता रहेगा, ये एक क्रम है होता रहेगा, चलते रहेगा, तो फिर जितना बड़ा सच सृजन है, उतना बड़ा सच विघटन भी। इस आसान से निष्कर्ष ,के विघटन पहलू ने मेरे कवि- ह्रदय को अंदोर दिया क्योंकि सृजन रातों रात नहीं होता युग आये चले गये  सृजन एक आकार लेता रहा पर- विघटन जब हुआ यूं हुआ मानों आभास ही ना हुआ, हां संहार, अवसाद से लेकर उच्छेद और उत्पाटन तक सब कुछ कितना शीघ्र हो गया। सोचने का, लिखने का, वक्त कहां मिला।

लघु शब्दों में और छोटे माप दण्ड में कहूं : एक पूरा मौसम और माहौल आया, मिलन और विदाई की खुशियाँ  और कसक लाया, किसी ने पुलकित कुमकुम का थाल सजाया – आरती उतारी और माथे पर रोली का टीका लगाया। मगर क्या हुआ अनायास ये तो अहसास करने का वक्त भी न मिला : एक पल आया और माथे की रोली वह गयी और मेरा कवि ह्रदय देखता रह गया दर्पण में: 

माथे का टीका मिटा हुआ

भीगी भीगी एक पंखुरीक्या तुम खुश हो मुझे हराकर

https://notionpress.com/read/droplets-on-petals

भीगी भीगी एक पांखुरी – क्या तुम खुश हो मुझे हराकर ; एक साहित्यिक काव्य ग्रंथ है जिसके मूल में हे एक सर्वोच्च सुकुमार वय व वत्सिम उम्र के मध्य झूलती नारी का असीम प्रेम जिसके सान्निध्य में आते ही धीर, वीर, संकल्पित, व्यथित, वैरागी, अनुरागी, क्षुद्र या फिर कोई महापुरूष सब हार जाते हैं , उसका प्रेम वो निर्मल धारा है जिसमें सब कुछ समाहित होकर रह जाता है बस विशुद्ध प्रेम ।

The infinite love of a woman swinging between the age of supreme age and the old age, when it comes to its end, is lost, heroic, determined, distressed, recluse, unconscious, petty, or a great man is lost. Her love is that pure stream in which everything is contained and remains pure love.

Notion Press

https://notionpress.com/read/be-possible-like-pace-of-universe

संभव हो जाता जग-गति सा
क्यों हम सब एक ऐसे दौर से गुजरते है जंहा, जब हमारे हाथ में कुछ नहीं होता । जितनी भी कोशिश करो होता वही है जो कहीं न कहीं नियति ने निश्चित कर रखा है । यदि आप के प्रयास व प्रयत्न सफल हो भी जाते हैं तो वो इसीलिए क्योंकि नियति ने वो सुनिश्चित कर रखा है और आपको लगता है कि ये आपके प्रयत्नों के कारण हुआ है । कुछ समय बाद आपको ये अहसास होने लगता हैं कि ये तो इसी तरह होना ही था । मगर क्यों ?
संभव हो जाता जग गति सा : एक मानसिक उद्वेलन है, एक चेतना, एक विचारधारा कि जिस तरह ये जग-गति स्व निर्मित, स्व संचालित, स्व आधारित है ठीक उसी तरह हमारा जीवन स्व संचालित, स्व आधारित, स्व निर्मित क्यों नही है । हर प्रयत्न व प्रयास के बाद भी जग गति सा एक धूरी पर स्थिर क्यों नहीं , क्यों सब कुछ इधर उधर बिखर जाता है, एक मानसिक द्वंद है कि क्यों सब कुछ प्रकृति की प्रवृति सा नहीं : क्यों नही संभव हो जाता जग गति सा ?

Why do we all go through an era where nothing happens as per our wish . Whatever we try, it happens as what destiny has set somewhere. Even if our efforts are successful, it is because destiny has ensured that and we feel that it has happened due to our efforts. After some time we start realizing that this was to happen in this way. but why ?

May It is not possible like the Pace of Universe. There is a mental upheaval, a consciousness, an ideology that just as this universe pace is self-created, self-driven, self-based, in the same way why our life is not self-driven, self-based, self-created. Even after every effort , why the our efforts and life is not stable on one axis, why everything is scattered here and there. There is a mental duality that why everything is not like nature’s nature or like the pace of universe why it is not possible to happen everything so natural and so inherent as the pace of universe.

शिव यात्रा

मेरे प्यारे दोस्तो
ये शिव के प्रति मेरा समर्पित काव्य ग्रंथ जो शुरू होता है एक अहसास से कि इसमे तो कुछ भी ठीक नहीं – ना सुर, ना सगींत, ना ही धुन और इसी अपरिपक्वक्ता के साथ अंत हो जाता है – उसी सुर , लय, धुन व संगीत की तलाश में। इसमे आपका आन्नंद नहीं है , इसमे मन व ह्दय को आन्नद विभोर करने की शक्ति नहीं है मगर ये आपकी आत्मा से टकराकर आपके अहम को चूर चूर कर देने की शक्ति रखता है जिससे आपको आपके अपने होने के अस्तित्व का ज्ञान हो। ये मार्ग है आकार से निराकार का। ये मार्ग हे अपूर्ण से पूर्णता का, ये मार्ग है अबोध से बोध का, ये मार्ग है अपरिपक्वक्ता से परिपक्वता का। पूरी तन्मयता से आत्मा पर कष्ट उठा कर सुने – इसके तत्व ज्ञान को समझे – इसमे प्रतिकूल सुर, लय, धुन व सगींत पर ध्यान न देकर इसके मर्म, व अंर्तनिहित तत्व को आत्मसात करे। सावन के इस महीने शुक्ल पक्ष की द्वितीया को आप लोगो को शिव की ये यात्रा समर्पित है।

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ज्योतिष संसार

मानव कल्याण के लिये ईश्वर ने अनेको रास्ते सुझाये। यदि जीवन मार्ग मे मृत्युतुल्य कष्ट हैं, पीङा है, बाधाएं है, शत्रु है, धोखें है, नजर दोष हैं, रोग हैं, दुख ही दुख है तो जीवन में इससे निजात पाने के लिये उपाय भी है कुछ दैनिक उपाय , कुछ आध्यात्मिक उपाय, कुछ अधोदैविक उपाय तो कुछ षट्कर्मों के उपाय। मैने अपने जीवन के इन तीस सालो मे अधिकांशतः सभी उपायों को प्रमाणित पाया है – ईश्वर के कार्य का फल थोङा विलम्ब से आता है ये भी अकाट्य सत्य है। क्योकि ईश्वर रास्ते बनाता है और रास्ते दिखाता है। इन रास्तों के बनने व परिलक्षित होने मे समय लगता है पर विश्वाश के साथ अडिग रहे और अपना निर्दिष्ट कर्म करते चले तो प्रमाण जरूर दिखता है। हां ये एक वृहत शास्त्र व दुनियां है तथा इसमे जीवन गुजर जाता है गहराई मे जाकर समझने व सपांदन करने मे अतः अनुभव और ज्ञान दोनो काम आता है – हमेशा कोई भी काम से पहले कुंडली की विवेचना द्वारा जान ले कि वो कार्य आपको सहयोग करेगा की नही किसी तरह की निष्फलता से बचने के लिये। जरूरत संपर्क की जननी है। अतः जरूरत है तो सकोंच ना करे जरूर संपर्क करे। 9477333055 ये व्हाटस् एप नम्बर है इस पर अपनी समस्या का जिक्र करे। कृपया इस नम्बर पर फोन न करे।