Prediction – 2020 (India)

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2020 – नये साल की चंद भविष्यवाणियों :
(1) दिल्ली के विधानसभा चुनावों में ‘आप’ पार्टी की जीत होगी ।

(2) बिहार के विधानसभा चुनावों मे किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं परन्तु नितीश कुमार का वापस मुख्यमंत्री बनना तय।

(3) अर्पेल – मई के मध्य युद्ध की प्रबल संभावना – खाडी देशों के मध्य तथा भारत पाक के मध्य युद्ध जैसी स्थिति ।

(4) जुलाई से सितम्बर के मध्य Share Market के प्रबल रूप से नीचे आने की संभावना ।

(5) सोने के दाम मे बेतहाशा बढ़ोतरी के साथ सोना 50000/- पार मई से जून के मध्य।

(6) देश मे आंतरिक कलह व असंतोष की वजह से भारी उथल पुथल जैसे हालात फरवरी से मार्च के मध्य तथा सितम्बर से अक्टूबर के मध्य

(7) असम प्रांत मे भारी उथल पुथल के मध्य भारतीय जनता पार्टी का विघटन लगभग तय जो मई महीने तक परिलक्षित होने की प्रबल संभावना ।

(8) पश्चिम बंगाल मे भारतीय जनता पार्टी की प्रबल रूप से कमजोर होने की संभावना।

(9) 2020 में पाकिस्तान मे समस्त उथल पुथल के बावजूद इमरान खान के सितारे बुलंद रहेंगे तथा Position और मजबूत होगी।

(10) पेट्रोल व डीजल के दामों मे जून महीने से ही अनवरत वृद्धि की प्रबल संभावना।

(11) भारत के पश्चिम प्रांतों मे भूकंप की संभावना के साथ साथ उत्तर भारत मे बर्फिला जलजला तथा दक्षिण भारत मे सुनामी की प्रबल संभावना ।

(12) भारत के निर्यात की नकारात्मक स्थिति तथा विदेशी मुद्रा पर प्रबल बोझ ।
AstroPalmist : Aditya Daga
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ज्योतिष के अनमोल उपाय

समृद्धिशाली चरण पादुका

आफिस या घर के मन्दिर मे जरुर रखे।
ज्योतिष सलाह के लिये सम्पर्क करे।सारा विवरण दिया हुआ हे।हस्त रेखा,अंक शाश्त्र तथा ज्योतिष गणना तीनो को मिलाकर सलाह दी जाती हे। जैसा की यहां विवरण दिया हुआ हे मेरी एक घन्टा सलाहकारीता की फीस नगण्य ही हे
मेरी सलाह मात्र गणना करना ही नही हे। आपकी सारी समस्या मैं धेर्ये के साथ
यदि आप किसी भी तरह की घोर समस्या मे फँस गये हे आर्थिक, स्वास्थ्य, विवाह या प्रेम संबधित, कार्य या कोई तो एक बार सम्पर्क करे। मैं किसी भी तरह से डर भय दिखाकर कोई रूपये नही कमाता तथा कोई महँगे उपाय नही बताता हूँ जब तक की बहुत ज्यादा ही जरूरी ना हो। अत: निर्भिक होकर मिले तथा अपनी समस्याओ से निजात पाये।
कोई नही जानता किसकी सलाह पर आपका

समृद्धिशाली स्वास्तिक

आफिस या घर के मन्दिर मे जरुर रखे।
ज्योतिष सलाह के लिये सम्पर्क करे।सारा विवरण दिया हुआ हे।हस्त रेखा,अंक शाश्त्र तथा ज्योतिष गणना तीनो को मिलाकर सलाह दी जाती हे। जैसा की यहां विवरण दिया हुआ हे मेरी एक घन्टा सलाहकारीता की फीस नगण्य ही हे।
मेरी सलाह मात्र गणना करना ही नही हे। आपकी सारी समस्या मैं धेर्ये के साथ सुनकर मनोविज्ञनिक सलाह से भी दूर करता हूँ।
यदि आप किसी भी तरह की घोर समस्या मे फँस गये हे आर्थिक, स्वास्थ्य, विवाह या प्रेम संबधित, कार्य या कोई तो एक बार सम्पर्क करे। मैं किसी भी तरह से डर भय दिखाकर कोई रूपये नही कमाता तथा कोई महँगे उपाय नही बताता हूँ जब तक की बहुत ज्यादा ही जरूरी ना हो। अत: निर्भिक होकर मिले तथा अपनी समस्याओ से निजात पाय
कोई नही जानता किसकी सलाह पर आपका भविष्य सुन्दर हो जायगा।

समृध्धिशाली हनुमत गदा

आफिस या घर के मन्दिर मे जरुर रखे।
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मेरी सलाह मात्र गणना करना ही नही हे। आपकी सारी समस्या मैं धेर्ये के साथ सुनकर मनोविज्ञनिक सलाह से भी दूर करता हूँ।
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समृध्धिशाली कच्छप

आफिस या घर के मन्दिर मे जरुर रखे।
ज्योतिष सलाह के लिये सम्पर्क करे।सारा विवरण दिया हुआ हे।हस्त रेखा,अंक शाश्त्र तथा ज्योतिष गणना तीनो को मिलाकर सलाह दी जाती हे। जैसा की यहां विवरण दिया हुआ हे मेरी एक घन्टा सलाहकारीता की फीस नगण्य ही हे।
मेरी सलाह मात्र गणना करना ही नही हे। आपकी सारी समस्या मैं धेर्ये के साथ सुनकर मनोविज्ञनिक सलाह से भी दूर करता हूँ।
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कोई नही जानता किसकी सलाह पर आपका भविष्य सुन्दर हो जायगा।

 

समृध्धिशाली श्री यंत्र।

आफिस या घर के मन्दिर मे जरुर रखे।
ज्योतिष सलाह के लिये सम्पर्क करे।सारा विवरण दिया हुआ हे।हस्त रेखा,अंक शाश्त्र तथा ज्योतिष गणना तीनो को मिलाकर सलाह दी जाती हे। जैसा की यहां विवरण दिया हुआ हे मेरी एक घन्टा सलाहकारीता की फीस नगण्य ही हे।
मेरी सलाह मात्र गणना करना ही नही हे। आपकी सारी समस्या मैं धेर्ये के साथ सुनकर मनोविज्ञनिक सलाह से भी दूर करता हूँ।
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कोई नही जानता किसकी सलाह पर आपका भविष्य सुन्दर हो जायगा।

समृध्धिशाली शाल्ग्रम

आफिस या घर के मन्दिर मे जरुर रखे।
ज्योतिष सलाह के लिये सम्पर्क करे।सारा विवरण दिया हुआ हे।हस्त रेखा,अंक शाश्त्र तथा ज्योतिष गणना तीनो को मिलाकर सलाह दी जाती हे। जैसा की यहां विवरण दिया हुआ हे मेरी एक घन्टा सलाहकारीता की फीस नगण्य ही हे।
मेरी सलाह मात्र गणना करना ही नही हे। आपकी सारी समस्या मैं धेर्ये के साथ सुनकर मनोविज्ञनिक सलाह से भी दूर करता हूँ।
यदि आप किसी भी तरह की घोर समस्या मे फँस गये हे आर्थिक, स्वास्थ्य, विवाह या प्रेम संबधित, कार्य या कोई तो एक बार सम्पर्क करे। मैं किसी भी तरह से डर भय दिखाकर कोई रूपये नही कमाता तथा कोई महँगे उपाय नही बताता हूँ जब तक की बहुत ज्यादा ही जरूरी ना हो। अत: निर्भिक होकर मिले तथा अपनी समस्याओ से निजात पाये।
कोई नही जानता किसकी सलाह पर आपका भविष्य सुन्दर हो जायगा।

 

हकिक मालाएं

हकिक रतन कई रंगो मे आते हैं तथा हर रंग के माला की अपनी एक खास उपयोगिता है जैसे :-
काले हकिक की माला नजर दोष से बचाती है, शत्रुओं से रक्षा करती हे।
लाल हकिक की माला उर्जा, शौर्य, शक्ति व बल देती है तथा विजय दिलाती हे।
नीले हकिक की माला शांति, मोक्ष, आत्म-चिंतन का मोका देती है।
हरे हकिक की माला सुख, स्वास्थ्य व समृध्धि देती हे।
पीले हकिक की माला वाणी पर वर्चस्व, सुर, संगीत पर अधिकार दिलाती हे
सफेद हकिक की माला आर्थिक सम्पन्न्त्ता, कर्ज मुक्ति, सहयोग दिलवाती हे।
इन मालाओ का अलग अलग ग्रहों, राशि, पर अधिकार होता हे।
और उन ग्रह राशियों की कुंडली मे स्थिति के अनुसार बाधा, कष्ट, या अन्य समस्या के हिसाब से कवज तैयार करके लगाये जाते हे।
ये हकिक मालाएं शक्ति जागरण, तथा शत्रुओ का दमन करने के काम मे भी लायी जाती हे।
इन मालओं पर जाप भी हो सकता हे या इनको सीधे सीधे पहना भी जा सकता हे।

तुलसी माला

तुलसी श्री विष्णू की प्रिय, ईश्वर का एक अद्भूत चमत्कार है।
तुलसी दाने की माला शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हे। ये माला शरीर के कई रोगो को ठीक करती हे।
तुलसी माला धारण करने से कई तरह की नाकारात्मक शक्तियाँ समाप्त होती हैं।
तुलसी माला के जाप भर से श्री विष्णू की कृपा प्राप्त होती है।

चामुंडा यंत्र

 

इस यंत्र की पूजा, उपासना, आराधना से आपके जीवन में उर्जा व शक्ति का संचार होता है। इस यंत्र की साधना से सब कष्ट दूर होते है तथा बाधाएँ पृश्मन होती है। इस यंत्र की दैनिक पूजा से सभी मनोकामनाएं पुरी होती है। ये यंत्र मन के सारे भय को दुर कर्ता हे तथा किसी भी तरह की प्रेत भुत बाधा से मुक्ति दिलाता है।
आप इस यंत्र को हमारे यहाँ से भी ऑनलाइन मँगवा सकते हैं।

 

चंद्र या सोम यत्रं

 

जिनकी कुंडली में भी चंद्र दोष हो जैसे
जिनका चंद्रमा वृश्चिक राशि में बैठा हो या,
अष्टम स्थान मे हो कर्क लग्नेश होकर या,
चंद्रमा केन्द्र स्थानों मे बैठा हो,
कृष्ण पक्ष षष्ठी से अमावस्या तक का जन्म हो,
ओर ऐसे अनगिनत योग जो चंद्र को क्षय करते हौ
तब ये मंगलकारी यत्रं अत्यन्त लाभकारी सिद्ध। होता है!

 

श्री सूर्य यंत्र

 

जीवन दायिनी व संरक्षक तथा पालक श्री सूर्य ग्रह को ईश्वर की संज्ञा इसलिये दी गई है जिससे लोग निरंतर सुबह सुबह सूर्य की जीवन दायी ऊर्जा के सम्पर्क मे रहे। इसके बाबजूद सूर्य कभी कभी कुंडली में बहुत ही बुरा प्रभाव डालता है जैसे :-
यदि सूर्य कुंडली में किसी भी भाव में तुला राशि में बैठा हो ।
यदि सूर्य लग्नेश होकर अष्टम स्थान मे बैठ गया हो ( यही सूर्य द्वादेश या तृत्येश या ष्षटेश होकर अष्टम मे बैठा हो तो अति उत्तम होता है विपरीत राजयोग की तरह)
यदि सूर्य कुन्डली में शनि या याहू के साथ बैठा हो या उससे दृष्टिगत हो ।
या सूर्य केन्द्र के किसी भी घर मे बैठा हो
तब इस यंत्र की स्थापना, पूजा जरूर करनी चाहिये

 

राहु देव का यंत्र – छिन्न्नामस्ता देवी यंत्र

 

जैसे केतू की आराधना बिना धूमकेतदेवी यंत्र के अधुरी हे उसी तरह राहु देव की कृपा पाने के लिये ये यंत्र बहुत जरूरी हे। वास्तव मे केतू को तो सिर्फ शुक्र,अर्थ,सुख, वैभव,समृध्धि का शत्रु माना जाता हे पर उसके विपरीत केतू मनुष्य के कर्मो को अध्त्यांत्म्म, चिंतन, साधना की तरफ ले जाता हे जो बढती उमर के साथ अच्छा माना जाता है।
पर राहु यदी खराब हुआ तो जो ज्यादातर खराब ही होता हे तीसरे, छठे व दशम घर को छोडकर तो ता उम्र कष्ट, विघ्न, सन्ताप, तडप, शत्रुता, गरीबी, मनहूसियत ही देता हे। एक तरह का बन्धंन योग बना देता हे। मनुष्य उस यग की पीडा से लाख प्रयत्न करने पर भी नहर नही निकल पाता और अन्त्त्त: उसे बस ईश्वर की शरण ही नजर आती है।
ज्योतिष शास्त्रों मे लिखा है व अनेक ज्योतिष राहु की दशम व एकादश भाव की स्थति को बहुत अच्छा बताते हे पर मेरे जीवन के 30 सालो के अनुभव मे एक भी ऐसा व्यक्ति नही आया जिसका राहु दशम या एकादश मे होते हुए भी वो खुश, संतुष्ट, स्मृध्ध व निरोगी था। अत: मुझे राहु की बात को लेकर ज्योतिष शास्त्र या ज्योतिष्यों पर बिल्कुल भरोसा नही है।
मेरा अनुरोध हे की राहु कहीं भी बेठा हो उसकी सदा कृपा प्राप्ति के लिये शिव तथा छिन्नामास्ता देवी की पूजा के साथ साथ काल भैरव की पूजा नित्य करते रहे।
राहु वास्तव मे पूर्व जन्म के अधूरे कर्मो, पापो, अकर्मो, अधर्मो, अप्कर्मो, प्रारबधो की सजा पुरी कराने के लिये व्यक्ति को मर्त्यलोक मे लेकर आता हे और विविध कष्ट देकर उसे प्रायश्चित करवाता हे विशेष कर अपनी महादशा, अन्तर्दशा, प्र्य्त्यंतर्दशा मे तथा संकटा की योगिनी दशा के प्रथम 4 सालो में।
राहु का चंद्र, सुर्य, लग्न से अस्टम या द्वादश बेठना या चंद्र, सुर्य, गुरु, मंगल के साथ बेठना बहुत ही खराब होता है।

 

केतू ग्रह का धूमावती यंत्र

 

ये यंत्र केतू संबंधी सभी समस्याओं से निजात दिलाता हे। जब जब कुंडली मे केतू तीसरा व छटा घर छोड़ कर कहीँ भी बेठता हे या फिर किसी शत्रु ग्रह के साथ बेठता हे जैसे शुक्र के साथ तो केतू के खराब प्रभाव को दूर करने के लिये बराबर केतू की पूजा, आराधना करे।
केतू जीवन मे व्यक्ति को आर्थिक स्थिति से बहुत कमजोर कर देता हे या युं कहुँ की पूरी तरह बर्बाद भी कर देता हे व्यक्ति को ईश्वर या अध्यात्म की तरफ प्रेरित करने के लिये। अत: केतू देव से प्रार्थना करने का मतलब हे धूमावती देवी व उच्छईष्ट गणपति की उपासना बराबर करते रहे अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाये रखने के लिये।
केतू को चन्द्रमा का दक्षिण ध्रुव कहा जाता हे तथा दक्षिण पश्चिम दिशा का स्वामी। इस दिशा को नेकृत्य दिशा भी कहते हैं। लेकिन केतू राहु की तरह किसी भी दिशा पर अपना प्रभाव नही डालता हे। बस ये ग्रह है जो व्यक्ति मे बहुत ज्यादा असंतोष व अलगाव की भावना भर देता है, दूसरो से संबंध तो जरुर ही बिगाडता है – ये तो प्रमाणित है। केतू व्यक्ति को जब दिवालिया करता हे तो बहुत बुरी तरह करता हे। निम्न स्तर के लोगो से उठने बेठ्ने को विवश कर देता है क्योंकि इन्सान के पास कुछ बचता नही।
केतू व्यक्ति को अन्तर आत्मा से शुध्ध करके ईश्वर प्राप्ति के रास्ते पर बढाता हे। यदि केतू अच्छा हुआ तो वर्ना ये ताम्सिक तंत्र मंत्र की दुनिया मे ले जाता हे जिसके लिये कई कारण बन जाते हे जैसे बर्बादी और शत्रु। तीसरे व छटे घर का केतू अच्छे अवसर नही देता हे पर खराब व अनाय घरो मे बेठा केतू गलत रास्तो पर ले जाता हे।
घर मे चोरी, डाकेती, आगजनी, ब्लास्ट, मार पीट, दुर्घटना सब कुछ केतू की वजह से होता हे। अष्टम व द्वादश का केतू चीर फाड़, सर्जरी, दुर्घटना जरुर करवाता हे।

 

 गणपति यंत्र

 

ये सभी हिंदू धर्म के लोग जानते हे की प्राचीन काल से गणेश या गणपति जी की सर्व प्रथम पूजा का प्रचलन है ! क्योंकि भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया था सर्व प्रथम पूजे जाने का। भगवान शिव ने अपने दोनो पुत्रो गणेश तथा कार्तिकेय को शृश्टि का चक्कर लगा कर सर्व प्रथम जो उनके पास वापस पहुंचेगा उसे वरदान मिलेगा बोलकर प्रतिस्पर्धा दौड़ में भेजा था । कार्तिकेय तो चल दिये पर गणेश जी को युक्ति सुझी- वो अपने माता पिता का चक्कर लगा कर शिव जी के सामने प्रस्तुत हो गये और बोले हे मातृ पितृ आप दोनो ही तो मेरी शृश्टि हो अत: मेरी परिक्रमा पूरी हुई।
शिव पार्वती उन्हे अवाक देखते रह गये और उनकी बुद्धि, ज्ञान, सूझ बुझ की क्षमता से चमत्कृत हो कर उन्हे सर्व प्रथम पूजे जाने का बरदान दे दिया !
हर शुभ अशुभ कार्य के पहले लोग इसलिए गणेश को स्मरण करना नही भूलते।
चूंकि सूर्य और घड़ी सदा पूर्व से दक्षिण होते हुए पश्चिम की दिशा मे जाती हे जिसे क्लॉक वाइज़ भी कहते हें अत: दक्षिण मुखी गणपति या गणेश जी एक अलग ही विशेषता है । दक्षिण मुखी गणपति की पूजा साधना से जीवन आगे बढता है तथा सीधी सटिक राह पर चलता है ।
कोई भी लगन राशि हो या चंद्र या सूर्य राशि हो कभी भी श्री गणपति की पूजा करना नही छोड़े । बहुत अधिक लाभ जीवन मे हो या नही हो लेकिन आपको ऐसा जरुर लगेगा की बुरे से बुरे समय मे भी कोई आपका साथ दे रहा है । बाकी बहुत बहुत अधिक लाभ या कोई अतिरिक्त अभिलाशा की पूर्ति के लिये कुछ अन्य उपाय भी करने पडते हे जो कुंडली से और प्रारब्ध से सम्भ्ंधित हैं ।
गणपति देव की पूजा का मंत्र है:- ऊं गं गणपतेय नम:।
कुंडली मे जब जब बुध ग्रह की समस्या हो जैसे बुध मीन राशि पर नीच हो गया हो या कुंडली मे जनम से ही वक्रि हो तो जरुर पूजा करे।

 

श्री गायत्री यंत्र

 

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी ! रोज 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करे। पहले पन्चोप्च्जार पूजा कर ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके गायत्री यंत्र की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

 

श्री मातन्गी देवी यंत्र

 

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । किसी पुरोहित से पहले पन्चोप्च्जार पूजा तथा यंत्र की साधना विधि सीख लें ।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके यंत्र की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

 

श्री कमला यंत्र

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । पहले किसी पुरोहित से पन्चोप्च्जार तथा कमला देवी की साधना सीख ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके यंत्र की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

 

श्री भुवनेश्वरी यंत्र

 

आयदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । किसी पुरोहित से पहले पन्चोप्चार की विधि तथा 10 महविध्या की साधना को विधि सीख लें।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके ओंकार की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

श्री तारा माँ यंत्र

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । किसी भी पुरोहित से पन्चोप्चार विधि तथा माँ तारा की पूजा विधि सीख ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके यंत्र की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

 

श्री बगलामुखी यंत्र !

 

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो भी इसकी साधना पहले किसी पुरोहित से अच्छे से सीख ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके ओंकार की साधना करे
ये खास यंत्र किसी और के द्वारा द्वेष, इर्ष्या, जलन, कुंठा मे आकर कोई गलत काम को निष्फल करने के लिये हे।

 

ओम षोडषी देविभ्यां नम:!

उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख तथा पूजा पन्चोप्चार आदी की प्रक्रिया पुरोहित से सीख ले ! 54 दिनो तक करे।

 

श्री त्रिपुरभैरवी यंत्र

 

शीघ्र लाभकारी यंत्र यदि इसकी साधना सही समय, सही नक्षत्र, सही तिथि व सही योग मे किया जाय!
उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख पन्चोप्चार आदी पुरोहित से सीख ले ।

नजर दोष, शत्रुता, द्वेष इर्ष्या मे किये या कराये हुए कोई कर्म को निष्फल करने के लिये!
उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख तथा पूजा पन्चोप्चार आदी की प्रक्रिया पुरोहित से सीख ले !

 

श्री गणपति यंत्र

 

घर मे जरुर स्थापित करे ! हर कमरे व मन्दिर मे !
उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख तथा पूजा पन्चोप्चार आदी की प्रक्रिया पुरोहित से सीख ले ! घर मे ही कम से 54 दिनो तक करे देखे कित्ना लाभ मिलता हैं!
श्री यंत्र
घर मे जरुर स्थापित करे सभी कमरो व घर के मन्दिर मे
उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख तथा पूजा पन्चोप्चार आदी की प्रक्रिया पुरोहित से सीख ले ! घर मे ही कम से 54 दिनो तक करे देखे कित्ना लाभ मिलता हैं!

श्री कुबेर यंत्र

कुबेर यंत्र सदा घर के मन्दिर मे या कही भी स्थापित करे ये सदा धन प्रदायक होता हे!:
उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख तथा पूजा पन्चोप्चार आदी की प्रक्रिया पुरोहित से सीख ले ! घर मे ही कम से 54 दिनो तक करे देखे कित्ना लाभ मिलता हैं!
नवग्रह यंत्र

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । ऊं ह्रीं श्रीम क्रीं मम सर्व ग्रहबाधा पृशमन कुरु कुरु! रोज 108 बार जाप करे। पहले पन्चोप्च्जार पूजा कर ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्र को अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके ओंकार की साधना करे तथा उपर दिया मंत्र 108 बार रोज पढ़े ।

श्री सर्वबाधाहरण यंत्र ।

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । ऊं मम सर्व बाधा पृशमन कुरु कुरु! रोज 108 बार जाप करे। पहले पन्चोप्च्जार पूजा कर ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके ओंकार की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

कमला यंत्र

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । पहले किसी पुरोहित से पन्चोप्च्जार तथा कमला देवी की साधना सीख ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके यंत्र की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

श्री भुवनेश्वरी यंत्र

आयदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । किसी पुरोहित से पहले पन्चोप्चार की विधि तथा 10 महविध्या की साधना को विधि सीख लें।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके ओंकार की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

श्री तारा माँ यंत्र

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो इस यंत्र की नित्य साधना करे आपको निश्चित सफलता मिलेगी । किसी भी पुरोहित से पन्चोप्चार विधि तथा माँ तारा की पूजा विधि सीख ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके यंत्र की साधना करे । सबसे सरल उपाय ।

श्री बगलामुखी यंत्र !

यदा कदा जीवन मे बेबजह, अकारण रुकावटे, बाधाएं आती रह्ती हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके निश्चित निदान हे पर उसके लिये काफी विधि विधान मानना पड्ता है और उस प्रक्रिया को कोई ज्योतिष संचालित पुरोहित करे तो अच्छा । पर यदि खुद करना चाहे तो भी इसकी साधना पहले किसी पुरोहित से अच्छे से सीख ले।
मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा ।
आप सभी पाठक गण इन यंत्रों पर ध्यान देते रहे और जो यंत्र मन आत्मा को अच्छा लगे उसको अपनाय तथा विधि विधान पन्चोप्चार से पूजा करके ओंकार की साधना करे
ये खास यंत्र किसी और के द्वारा द्वेष, इर्ष्या, जलन, कुंठा मे आकर कोई गलत काम को निष्फल करने के लिये हे।

 

षोडषी देवी य॔त्र

ओम षोडषी देविभ्यां नम:!
उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख तथा पूजा पन्चोप्चार आदी की प्रक्रिया पुरोहित से सीख ले ! 54 दिनो तक करे।

श्री त्रिपुरभैरवी यंत्र

शीघ्र लाभकारी यंत्र यदि इसकी साधना सही समय, सही नक्षत्र, सही तिथि व सही योग मे किया जाय!
उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख पन्चोप्चार आदी पुरोहित से सीख ले ।

श्री दक्षिण काली यंत्र

नजर दोष, शत्रुता, द्वेष इर्ष्या मे किये या कराये हुए कोई कर्म को निष्फल करने के लिये!
उपर वर्णित पदत्ति से पूजा करे निश्चित मनोकामना पूर्ण होगी । मेंने पाठक गण की भलाई के लिये बहुत से यंत्र दिये हे! पूर्व काल मे पुरोहित और जागा आपकी कई पीढीयों के गोत्र बता देते थे जिससे ये पता लगता था की व्यक्ति सूर्यवंशी हे या चन्द्रवंशी या मिश्रित या कोई और! उसका गोत्र किस ऋषी मुनी या नक्षत्र के हिसाब से आया हुआ हे। इन सब बातो को ध्यान मे रखकर अलग अलग यंत्र की सटिक पूजा बतायी जाती थी पर धीरे धीरे कलियुग के बढ़ने के साथ साथ नियोग आदी प्रचलन मे आने के बाद कई वंशो के गोत्र जानने और उस हिसाब से पितरो आदी के काम के साथ साथ पूजा आदी के भी नियमो का बहुत उल्लंघन होने लगा।
अत: ये जितने तरह के यंत्र हे ये सब काम मे आने लगे । कुछ मालुम नही एक आम पुरोहित या व्यक्ति को कोन से यंत्र की कब, कहाँ, किस तरह, किस यंत्र की पूजा की जाए जो कोई खास मनोकामना को पूर्ण कर सके !
मेरी सलाह हे की हमारी आत्मा व जीव पूर्व जनम के संस्कारों से जड़ी हे अत: यदी आप अपनी अन्तरत्मा की आवाज सुने तो आपको खुद ये भाव आ जायगा की आप कोन से यंत्र की पूजा करे और ऐसा करने पर आपको खुद ही काफी मानसिक शान्ती मिलेगी और यंत्र पूजन का लाभ मालुम चलेगा
एक ही मनोकामना पूर्ति के कई कई यंत्र हे तथा अलग अलग विधि हे पूजा साधना की। आप सभी पाठक गण को जिस यंत्र पर और इश्वर के रूप पर आस्था लगे उस यंत्र की पूजा साधना पूरी तन्मयता और विधि विधान से करे निश्चि लाभ होगा !
पूजा साधना से पहले उपयुक्त तिथि योग नक्षत्र आदी देख तथा पूजा पन्चोप्चार आदी की प्रक्रिया पुरोहित से सीख ले !

 

Horticulture

Description

A highly motivated and diversified company with wide experience in the field of varied Project, Market, Corporate and Allied Consultancies to provide a “Consortium” of “medley” activities.

Since 1988 “Our core business” is to source and provide time – sensitive, trend-oriented, consumer services under one roof – just to make you look straight at one place to achieve your goal.

Our Management team includes Directors supported by professional management team, consisting of qualified “Consultants, Engineers, Architects Values, Chartered Accountants, Cost Accountants, Advocates & Solicitors at each branch. Our office equipped with modern designing & computing facilities with skilled workforce.

Our companies give you a complete package and nutrition to feed your imagination and dreams-From conception to imagination to creation, From evaluation to ornamentation , From revaluation to recommendation.

Out Of Mind

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Product Description

Mind is very confusing and sometimes block the thought process of the persons. Why It happens. After lot of spiritual thoughts I come to a conclusion that every person has a strong feeling of wanting anything which he or she require or has a very strong wish to happen something in his or her favor.
From childhood’s wishes, fantasies, & hopes, teenage age confusing & burning desires, passion, sensuality, infatuations, yearnings & cravings ; Youth age sexual appetite, lust, carnal passions, desperations, monetary desperations, blind desires of flying high; Adulthood’s expectations for survival & social recognitions , and finally longings of peace and intimacy, Spiritual renunciation with advancing age to the lingering death there is only one truth that everyone is having Wanting & Desires. This wanting, desires, passion, cravings & yearnings causing lot of complexities, confusions, depressions, in one’s mind keeping him or her OUT OF MIND. Less of expectations from life, family, society, God or oneself more will be the happiness. But How. Many persons ask me how I shall come out of these confusing, blind & burning desires, cravings & expectations to keep myself contended & satisfied. How one shall differentiate Confusions with Realities. How one shall achieve his focus, contentions & happiness. I have tried to reply many such confusions based on my many years of counselling and advisory services to many confused and depressed persons of all ages without differentiating gender, caste or creed.

If any one getting ‘Out Of Mind’ ? Then this is a ‘Must Read Book’. This is a ‘Journey of Mind’ from “feeling lost’ due to non ending confusions to ‘acceptance’ of realities of life. This book is not going to teach you reason and moralities on why, when, How you lost yourself in the wood of random confusions, complexities, melancholia, sorrows, loneliness and ecstasies. This book starts where you ends. This is a must read guide to restart yourself from the point where you finally stopped . Because I believe that sun is going to rise again. Once you get out of Mind a flow of soul power enters into the blood and re energizes your whole body and actions. It’s true and realized by all the people lost somewhere in this big universe.

About the Author

Author Aditya Kumar Daga Lyricist, Poet & Artist & composer by soul, Counselor, Astrology, Palmistry & Numerology Adviser, Project Consultant since 1986 till 2016 30 Years faced lot of turmoils, volatility, losses, depressions, sorrows, loneliness, melancholia, despondency, failures, miseries, social rejections, misunderstandings continuing to defame & introversion,Ups & downs, mergers & splits and lot more. But when I look back my own tragedies somewhere enlighten the life of others. because what i have learned in such turmoils simply passed on to the disturbed souls and tried honestly & genuinely to rejuvenate, rebuilt 7 recreate their energy, strength & life. I always thanked God for giving me all such turmoils as God teach me essence of life and death. It make my life easy even in between all such life volatility to carry on again and to assist others to make them strong to carry their life again after all kind of miseries, sorrows and pain. So I always though that their is a definite morning in one’s life as this is the pattern of Creation Of Universe and this the Journey Of Soul and this the only way of knowing Confusions Vs. Realities once you are getting Out Of Mind.

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A highly motivated and diversified company with wide experience in the field of varied Project, Market, Corporate and Allied Consultancies to provide a “Consortium” of “medley” activities.

Since 1988 “Our core business” is to source and provide time – sensitive, trend-oriented, consumer services under one roof – just to make you look straight at one place to achieve your goal.

Our Management team includes Directors supported by professional management team, consisting of qualified “Consultants, Engineers, Architects Values, Chartered Accountants, Cost Accountants, Advocates & Solicitors at each branch. Our office equipped with modern designing & computing facilities with skilled workforce.

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Lost Soul

Description

Prologue
Acceptance’ – Shall I mean it if I never adapted to it. Speed of my mind crushed me a day. I was lying flat. A cover of white blood on me. And over to it something with a roaring speed again hit and grilled me. I felt happy . God helped me to be meshed as I wished when I was a kid in my first pure thoughts.

As I was obliging to some unknown, unseen, undefined shade of being dead or living, one more attack happened on me ! Oh sorry not on my body but on something invisible in me. Something hit me not from back or front but from above and from below me. Something squeezed me, started thinning me and started collecting my remaining white blood drops.

Just remember no Red Blood. as I had no Red Blood. I don’t know what is Red Blood and I have never seen my Blood being red. I remember my first look with my blank eyes over my first drop of white blood.. Ya you may laugh on me but I have no way to pursue you about my White Blood. Any day I will get my Red Blood I will definitely come to you to show it.

So I started my story with one plain word ‘Acceptance” and I shall start unfolding the intricate knot of this big thread ‘Acceptance’.

What I shall accept and why ? Do I accept my lost childhood? my lost teachers still like a shadow in my mind ? my lost class mates innocent pink shaded ? my lost places amazingly black and white in my memories? my lost schools best ever place to experiment my all kind of feels and love? my lost colleges amazingly my first place which taught me about my ego and dignity? my lost parents always sharing, caring and loving to me in all circumstances? my lost relatives who always loved me more then any one else? my lost emotions which make exorbitantly arrogant and lavish? My lost soul which forbidden me for everything lost and abandoned me with my body forever.?
My little girl, my love, my soul can never be named by me. She was ‘Neelkamal’ sometimes ‘Aditi’ sometimes ‘Monisha. I finally named her my ‘Lost Soul’ foregone forever.
Aditya Kumar Daga

https://www.amazon.com/dp/B07XB4SQGD/ref=cm_sw_r_cp_awdb_t1_HoyeEbPPGMK2X

Emerging New India

Description

This Book is to encourage Students, youngsters, entrepreneurs lacking proper knowledge under one roof.This Book is my genuine effort to provide the correct guideline to everyone interested seriously to do something big. My sole aim is to provide a proper guideline under one roof to pace the commercial & Industrial work smoothly.All data & statistics, declarations, Govt. Policies, Estimates have been compiled from varied general public sources.I wish all the patron to move cautiously with a hope of best of the time ahead.This book is a compilation of Data from different sources for the benefit of mass and give or sold at the cost of bringing this book to the people

Despite so many incentives provided by the State & Central Government to set up an Industry; so many reforms made to ease the procedures of providing Licenses, Approvals, Clearances, No objection etc.; removal of so many hurdles related to Allowances/ Grant of permission of electricity, water & other infrastructural facilities there is no substantial improvement in the Industrial Growth Rate. The reason behind it: –

Unawareness on the part of new investors specially our Youth and new Entrepreneur
regarding the facilities provided by the Govt. and procedures of seeking such facilities.

Moreover there is a wide-spread ignorance among investors regarding where & how they
should collect proper information’s to start with and how to summaries available information if
any to set up a project. Even though there is a vast pool of information’s available through
different sources but of little use if such sources could not be tapped by the investors.

Till date no “Website” or “Book” is available which can guide the Investors step by step to begin
“to set up an Industry” or “to choose one option out of so many option regarding choosing up
of Land, Products, etc.

During the time of our project execution in last 15 years MCPL has come across the basic problem with most of the investors that they can not come to any decision out of so many alternatives related to selection of an industry, selection of a product, selection of Land, selection of Equity Pattern, Collaboration/Technology etc. And being set into a mess of so many raw information most of investors either turned down their proposals and if carried on then waste a huge amount of money at the initial stage of Project set up.

So this is the first attempt of MCPL to guide such Investors “HOW TO SELECT AN OPPURTUNITY.” This book is more emphasizing in How, Where, When & Why you should choose a project so that you could easily determine over one product/industry/location.I hope that my attempt to provide logical guideline would be appreciated by you.
Regards
Aditya Kumr Daga

 

एक मौसम आया कहने को

Description

एक मौसम आया कहने को – एक काव्य श्रखँला नहीं है परन्तु एक महाकाव्य है मेरे उस चेतन मन को अंदोरने का जो बारंबार बिछड़े हुए रिश्तों के यादों को समेटने का निरर्थक प्रयास करता है । एक झंझा वात सा उठता है जैसे ही मौसम लौट कर आता है। ऐसा लगता है कि जो पिछले मौसम के साथ चला गया , हमारी उम्र, हमारे संगी साथी, हमारे रिश्ते नाते, हमारे पथ-पर्दशक, हमारे शिक्षक, कोई भी तो लोट कर नहीं आने वाला है । पर जब सब कुछ छूट रहा था तब अहसास कहां था छूटने का, तब तो आगे बढने का हौसला था ,और एक दिन बैठ कर बीते हुए दिनों पर पश्चाताप करना ही था

First Zodiac Triangle

Description

My intention is to provide the readers a very comprehensive guide . Even after putting my sincere efforts in this regard if readers feel unsatisfied they are hereby requested to note & mention me lapses which might be there inadvertently.

This is exactly not a Book but a research paper compiled in the form of of a Book based upon my many years of practical experience in this field preparing and reading Horoscopes as per true natal charts as well as charts based on Sun Signs as per Vedic and other beliefs.

I have tried to mention here the most common and popular view of the great Astrologers. Though I myself find lot of anomalies and contradictions in this theory. But sometimes I find consistency and exactness of the vedic texts.

A person can enlighten himself just by going through it once. A must Read Book For all Novice, Beginners & Professionals.

Palmistry

Description

About PalmistryPalmistry is a treasure island. It’s valuable hidden information act like a ready reckoner and able to reveal many secrets of life instantly. It is like Alibaba’s secret cave But one must know How it shall be open and enter. It’s like to gather mastery not only by seeking academic education but by one’s own intuitive powers. Intuitive powers are of two types one is God Gifted and one carry it from his or her Birth. Since his child hood he behaved odd and could reveal lot of surprising original well proved facts of life naturally and instantly. Second type of Intuition is gathered through Vedic Yoga and meditations in a specific and particular manner under close supervision of senior mediators Palmistry is a very surprising subject and sometimes people get shocked by the readings and findings. But Why and How ? Everyone try to analyze it. Actually it works due to Two major reasons :- The very first reason lies in the birth order and the Genes, certain new Born babies carry with their Birth certain strong Signs of happenings of their life as they have Reborn or their soul has reincarnated with a predetermined and pre fixed Life path. And all such Pre Fixed Life path is revealed through their lines and signs on their Palms, Feet’, Chest, Forehead etc. However in everyone’s palm Glyphs are always there since birth and it is due to genetic constitutions and it decide the major quality of palm and the person The second reason is scientifically proved pattern of Blood Flow as when blood start to take it’s course after pumped from lungs then it flow to wards Mind , carry all the sensations and graph of Mental vibrations and started approaching the Body parts where it comes First towards hand-shoulder-wrist-palm and fingers and blood returns from the tip of the finger again approach the palm and then get circulated through the body. Now during it’s return course it left all the vibrations and sensitivity graph on the palm in the form of palm Lines. So all the inputs mind give finally revealed on the palm.So it is said that except the major lines given by god at the time of Birth all other influence and minor lines change as the Mind vibrates or think . It depends on the basic education, guardianship, teachers, environment, struggles and love of the life which not the least but majorly frame the shape , color, quality of palm lines.So our ancestors always insisted on Good Food, Sound Sleep, Better Health, Fine Environment, Best Friends and many Traditional Ways of Living like Good Manners, Good Discipline in every sphere of Life and Good ways of leading the life just to keep the vibrations of mind good and ultimately to get a good impact on the Lines on palm called the Life building Lines.Palmists are the persons who whether by virtue of their genetic birth Quality or progressed learned intuitive powers get mastery in reading, analyzing, absorbing , such lines and it’s meanings not only superficially but by also through their inner eyes or called the eyes of their mind, heart and Soul.